World Ramayana Conference: जबलपुर में संतों ने दिया राम के जीवन से परिश्रम, मित्रता और सामाजिक समरसता का संदेश
Written by: , BTECHWALA
Source: News Twitter
Last Updated: January 02, 2026 | 18:56 IST
जबलपुर (मध्य प्रदेश):
जबलपुर में आयोजित 4th World Ramayana Conference का समापन भव्य आयोजन के साथ हुआ। इस अवसर पर देश-विदेश से आए संतों, विद्वानों और धर्माचार्यों ने भगवान राम के जीवन को आज के समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। सम्मेलन में राम के कठोर परिश्रम, त्याग, मित्रता और सामाजिक समरसता पर विशेष जोर दिया गया।
राम का जीवन: कठिन परिश्रम और समानता का आदर्श
सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भगवान राम का जीवन केवल राजकाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने:
- वनवास के दौरान कठिन परिश्रम और संघर्ष किया
- निषादराज, शबरी माता जैसे लोगों के साथ समान व्यवहार किया
- मित्रता, सेवा और करुणा को जीवन का मूल आधार बनाया
यह संदेश आदिवासी, गिरिवासी और समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचता है।
Jagadguru Rambhadracharya का बड़ा आह्वान
सम्मेलन को संबोधित करते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय जीवन दर्शन का मूल आधार है।
उन्होंने केंद्र सरकार और संसद से अपील की कि:
रामचरितमानस को संसद में बहुमत से ‘राष्ट्रीय ग्रंथ’ घोषित किया जाना चाहिए।
उनका कहना था कि इससे भारतीय संस्कृति, नैतिकता और सामाजिक एकता को संस्थागत सम्मान मिलेगा।
क्यों राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित होना चाहिए रामचरितमानस
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने तर्क दिया कि:
- रामचरितमानस समाज को धर्म, करुणा और न्याय की शिक्षा देता है
- यह ग्रंथ जाति, वर्ग और क्षेत्र से ऊपर उठकर मानवता का संदेश देता है
- World Ramayana Conference तभी पूरी तरह सफल माना जाएगा, जब इसे राष्ट्रीय मान्यता मिले
सुंदरकांड, समकालीन संदर्भ और आध्यात्मिक संदेश
अपने संबोधन में उन्होंने सुंदरकांड के 23वें दोहे की 5वीं पंक्ति का उल्लेख करते हुए आत्मबल और सत्य के पक्ष में खड़े होने की भावना को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि राम का चरित्र हर संकट में धैर्य और न्याय का मार्ग दिखाता है।
महात्मा गांधी और रामचरितमानस
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी जी ने राम के नाम के माध्यम से पूरे देश को जोड़ा।
उन्होंने बताया कि
“रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम”
के शब्द रामचरितमानस से प्रेरित हैं, जो आज भी समाज को जोड़ने की शक्ति रखते हैं।
मुख्यमंत्री की सहभागिता
मुख्यमंत्री CM Mohan Yadav Ramayan Conference में सहभागिता की और इसे भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच देने वाला आयोजन बताया। उन्होंने कहा कि रामायण केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिशा है।
समापन संदेश
सम्मेलन के समापन पर यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि भगवान राम:
- आदिवासी-गिरिवासी समाज के भी आराध्य हैं
- सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं
- आज के समय में नैतिक नेतृत्व का आदर्श प्रस्तुत करते हैं
World Ramayana Conference ने राम के जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया।