फोकट का सवाल मत पूछो…” इंदौर पानी कांड में क्यों फंस गए Kailash Vijayvargiya News? जहरीला पानी, 13 मौतें…

Written by: BTECHWALA
Last Updated: January 02, 2026 | 15:13 IST

Kailash Vijayvargiya News , Indore water crisis: क्या है पूरा मामला

देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में दूषित पेयजल ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। भागीरथपुरा इलाके में सीवेज मिला पानी पीने से अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा लोग बीमार बताए जा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि पाइपलाइन लीकेज के कारण पीने के पानी में गंदगी मिल रही थी।

मीडिया सवाल पर क्यों भड़के कैलाश विजयवर्गीय

Kailash Vijayvargiya News

घटना के बाद जब मीडिया ने नगरीय विकास मंत्री Kailash Vijayvargiya News से सवाल किया, तो उन्होंने जवाब देने के बजाय कहा—
“फोकट का सवाल मत पूछो।”

यह बयान इसलिए और विवादास्पद हो गया क्योंकि:

  • घटना उनके विधानसभा क्षेत्र इंदौर-1 की है
  • लोग मौत और बीमारी से जूझ रहे थे
  • जिम्मेदारी तय करने के सवाल उठ रहे थे

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मंत्री को माफी मांगनी पड़ी

कांग्रेस ने क्यों मांगा इस्तीफा

कांग्रेस ने इस बयान को:

  • संवेदनहीन
  • सत्ता का अहंकार
  • प्रशासनिक विफलता से ध्यान हटाने की कोशिश

बताते हुए कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग कर दी। विपक्ष का कहना है कि जब जनता मर रही थी, तब मंत्री और स्थानीय नेता जवाबदेही से भागते नजर आए।

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‘नीले कुर्ते वाले’ नेता पर भी सवाल

वायरल वीडियो में मंत्री के साथ एक स्थानीय पार्षद कमल वाघेला भी नजर आए, जो पत्रकार से उलझते दिखे।

आरोप क्या हैं?

  • लोगों की शिकायत पर उन्हें धमकाकर भगाया
  • 4 महीने से पानी की समस्या की अनदेखी
  • संकट के समय पार्क में झूला झूलते वीडियो वायरल

यह वही इलाका है जहां दूषित पानी से मौतें हुईं।

सरकार की कार्रवाई और मुआवजा

सरकार ने मामले में:

  • संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई
  • प्रभावित परिवारों को मुआवजे की घोषणा
  • जल आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था

की बात कही है। हालांकि सवाल अब भी कायम हैं कि इतनी बड़ी लापरवाही समय रहते क्यों नहीं रोकी गई

स्वच्छ शहर की छवि पर बड़ा सवाल

इंदौर, जो लगातार स्वच्छता रैंकिंग में अव्वल रहा है, वहां:

  • पीने का पानी जहरीला निकला
  • प्रशासनिक निगरानी फेल हुई
  • जनप्रतिनिधियों का व्यवहार सवालों में आया

यह मामला अब सिर्फ पानी का नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और जवाबदेही का बन चुका है।

इंदौर पानी कांड ने दिखा दिया कि बड़े दावे और रैंकिंग तब तक बेकार हैं, जब तक मूल सुविधाएं सुरक्षित न हों। मंत्री का बयान इस त्रासदी को और गहरा कर गया, जिसकी राजनीतिक कीमत अब सरकार को चुकानी पड़ सकती है।

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