India–EU Trade Deal: यूके से 6 गुना बड़ा ऑटो कोटा, भारत में सस्ती होंगी यूरोपीय कारें

भारत और यूरोपीय संघ (European Union) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर 27 जनवरी का दिन ऐतिहासिक बन गया। करीब 18 साल की लंबी बातचीत के बाद भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के बीच यह व्यापार समझौता अंतिम रूप से तय हुआ है। इस डील को लेकर सबसे अहम चर्चा ऑटो सेक्टर को लेकर हो रही है।

इस समझौते के तहत भारत ने यूरोपीय संघ को ऐसा ऑटोमोबाइल कोटा ऑफर किया है, जो ब्रिटेन (UK) के साथ हुए समझौते की तुलना में लगभग छह गुना अधिक माना जा रहा है। इससे भारत में आयात होने वाली यूरोपीय कारों पर शुल्क में बड़ी कटौती का रास्ता साफ हो सकता है।

ऑटो सेक्टर को लेकर क्या है बड़ा फैसला

जानकारी के अनुसार, इस ट्रेड डील के तहत भारत चरणबद्ध तरीके से करीब 2.5 लाख यूरोप में निर्मित वाहनों को भारतीय बाजार में प्रवेश की अनुमति देगा। इसकी तुलना में ब्रिटेन को दिए गए कोटे में सिर्फ लगभग 37,000 यूनिट शामिल थीं।

यह आंकड़ा दिखाता है कि यूरोपीय संघ को दिया गया ऑटो कोटा अब तक का सबसे बड़ा माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत के ऑटो मार्केट की बढ़ती क्षमता और उपभोक्ता मांग को दर्शाता है।

आयात शुल्क implying बड़ी कटौती

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते के तहत:

  • करीब 1.6 लाख Internal Combustion Engine (ICE) यानी पेट्रोल-डीजल कारों पर आयात शुल्क अगले पांच वर्षों में घटकर 10 प्रतिशत तक लाया जाएगा।
  • लगभग 90,000 इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) पर यह रियायती शुल्क दसवें वर्ष से लागू होगा।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहनों पर शुल्क में देरी का उद्देश्य भारत के घरेलू EV उद्योग को समय देना और उसे प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है।

अभी कितनी लगती है आयात ड्यूटी

फिलहाल भारत में पूरी तरह आयातित कारों पर 110 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता है। यह शुल्क दुनिया के सबसे ऊंचे टैक्स स्ट्रक्चर में गिना जाता है।

डील के तहत शुरुआती कोटे में शामिल वाहनों पर ड्यूटी लगभग 30 प्रतिशत से शुरू होगी। वहीं, कोटे से बाहर आने वाली जीवाश्म ईंधन से चलने वाली कारों पर भी 10 वर्षों में शुल्क घटाकर 35 प्रतिशत करने पर सहमति बनी है।

ऑटो सेक्टर से जुड़े जानकार इसे भारत के आयात शुल्क ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव मान रहे हैं।

किन कंपनियों को मिलेगा सीधा फायदा

इस ट्रेड डील से यूरोपीय ऑटो कंपनियों को भारतीय बाजार में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • Mercedes-Benz
  • Volkswagen AG
  • Stellantis NV
  • Renault SA

विशेषज्ञों के अनुसार, शुल्क में कटौती का सीधा असर इन कंपनियों की कारों की कीमतों पर पड़ेगा। भारत में इन ब्रांड्स की लग्ज़री और प्रीमियम कारें पहले के मुकाबले सस्ती हो सकती हैं।

पीएम मोदी का बयान

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के किसानों, छोटे उद्योगों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को यूरोपीय बाजार तक बेहतर पहुंच देगा।

प्रधानमंत्री के अनुसार, यह केवल एक ट्रेड डील नहीं है, बल्कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच निवेश, इनोवेशन और सप्लाई चेन सहयोग को मजबूत करने वाला दीर्घकालिक ढांचा है।

आगे क्या बदलेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि India–EU FTA से:

  • ऑटो सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
  • उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प मिलेंगे
  • भारत में प्रीमियम कारों की कीमतों में धीरे-धीरे गिरावट आएगी
  • निवेश और मैन्युफैक्चरिंग को नया प्रोत्साहन मिलेगा

हालांकि, इस डील का पूरा असर अगले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से दिखाई देगा।


Disclaimer

यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। नीति और शुल्क संरचना में समय के साथ बदलाव संभव है।

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