क्या आपके बच्चे भी दिन भर मोबाइल में रील (Reels) स्क्रॉल करते रहते हैं? अगर हाँ, तो सावधान हो जाइए। जिसे आप सिर्फ ‘टाइम पास’ समझ रहे हैं, वह असल में एक खतरनाक लत बन चुका है। मध्य प्रदेश (MP) से आई एक सरकारी रिपोर्ट ने हर माता-पिता की नींद उड़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ एक साल में 13,000 से ज्यादा नाबालिग लड़कियां अपने घर से गायब हो गई हैं।
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चौंकाने वाले आंकड़े: कहाँ गईं 13 हजार बेटियां? (The Shocking Stats)
पुलिस मुख्यालय (PHQ) की महिला शाखा ने 2025 की समीक्षा रिपोर्ट जारी की है। आंकड़े बताते हैं कि बच्चियों का बचपन मोबाइल की स्क्रीन में गुम हो रहा है।
- कुल गायब बच्चियां (2025 में): 13,146
- घर से नाराज होकर भागीं: 5,692 (43.3%)
- प्रेमी के साथ भागीं (Love Affair): 2,418 (18.4%)
- रिश्तेदार के यहाँ गईं: 1,959
- रास्ता भटकीं: 131
‘रील’ से चढ़ा प्रेम रोग (The Reel Connection)
रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक बात यह है कि 2,418 लड़कियां सिर्फ ‘प्रेम प्रसंग’ के चलते घर से भाग गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा हाथ फ्री इंटरनेट और सोशल मीडिया रील्स का है।
- बच्चे रील देखकर फिल्मी दुनिया को सच मान लेते हैं।
- उम्र से पहले ही वे ‘मैच्योर’ हो रहे हैं और नकारात्मक चीजों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।
- फोन पर आसानी से उपलब्ध पोर्नोग्राफी और रोमांटिक कंटेंट उन्हें गुमराह कर रहा है।
एक्सपर्ट की चेतावनी: माता-पिता क्या करें?
मनोचिकित्सक (Psychiatrist) डॉ. आर.एन. साहू के अनुसार, बच्चे बचपन खो रहे हैं। वे रील के चक्कर में वास्तविकता से दूर हो रहे हैं।
सावधान रहें: “बच्चों को फोन तो दें, लेकिन उन पर नजर भी रखें। देखें कि वे सोशल मीडिया पर क्या देख रहे हैं और किससे बातें कर रहे हैं। उनसे दोस्ताना व्यवहार रखें ताकि वे घर से नाराज होकर भागने जैसा कदम न उठाएं।”
सबसे बड़ी वजह: घर से नाराजगी
हैरानी की बात यह है कि गायब होने वाली बच्चियों में सबसे बड़ा आंकड़ा (5,692) उन लड़कियों का है जो घर वालों से नाराज होकर भागीं। यह दिखाता है कि माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद (Communication Gap) खत्म हो रहा है, जिसे भरने का काम अब मोबाइल फोन कर रहा है।
Conclusion: यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि समाज के लिए खतरे की घंटी है। अपने बच्चों को ‘वर्चुअल दुनिया’ से बाहर निकालें और उनसे बात करें। इस खबर को हर पेरेंट्स के साथ शेयर करें ताकि वे भी जागरूक हो सकें।
- Call to Action (CTA): आर्टिकल के अंत में एक सवाल पूछें – “क्या बच्चों को कम उम्र में पर्सनल मोबाइल देना सही है? कमेंट में अपनी राय दें।” (इससे यूजर कमेंट करेंगे और आर्टिकल की रीच बढ़ेगी)।