By: सीनियर फीचर्स डेस्क | स्थान: जमशेदपुर, झारखंड | अपडेटेड: 20 जनवरी 2026
Disabled Writer Inspirational Story: एक ऐसी कहानी जो आपकी हर शिकायत को छोटा कर देगी और आपको जीवन जीने का नया नजरिया देगी।
जमशेदपुर के साकची इलाके की व्यस्त सड़कों पर, जहाँ हजारों लोग रोज अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में व्यस्त रहते हैं, वहीं सड़क किनारे एक प्लास्टिक की तिरपाल के नीचे एक असाधारण संघर्ष की कहानी सांस ले रही है। यह कहानी है मृत्युंजय शर्मा की। एक दिव्यांग व्यक्ति, जिसने पिछले सात वर्षों से फुटपाथ को ही अपना घर बना लिया है। लेकिन यह खबर उनकी लाचारी की नहीं, बल्कि उनकी अदम्य जिजीविषा और बौद्धिक क्षमता की है।
फुटपाथ पर रहते हुए, तमाम अभावों के बीच, मृत्युंजय ने एक या दो नहीं, बल्कि पूरी 11 किताबें लिख डाली हैं।
संघर्ष का दूसरा नाम: सात साल का वनवास
मृत्युंजय शर्मा की कहानी आसान नहीं है। एक दिव्यांग व्यक्ति के लिए समाज में सामान्य जीवन जीना ही एक चुनौती होती है, लेकिन जब सर पर छत भी न हो, तो यह चुनौती कई गुना बढ़ जाती है। पिछले सात सालों से उन्होंने हर मौसम—कड़कड़ाती ठंड, झुलसाने वाली गर्मी और मूसलाधार बारिश—को इसी फुटपाथ पर झेला है।
उनकी एक तस्वीर, जिसमें वे जमीन पर बैठकर एक रजिस्टर में कुछ लिख रहे हैं और उनके बगल में उनकी बैसाखी रखी है, उनकी पूरी दास्तान बयां करने के लिए काफी है। उनके पास संसाधनों के नाम पर सिर्फ एक कलम, कुछ कागज और कभी न टूटने वाला हौसला है।
कलम बनी हथियार: संविधान से लेकर समाज तक पर चिंतन
अक्सर अभावों में इंसान टूट जाता है, लेकिन मृत्युंजय ने अपने अभावों को अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने भिक्षा मांगने के बजाय शिक्षा और लेखन का रास्ता चुना।
उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकों के विषय हैरान करने वाले हैं। फुटपाथ पर रहकर उन्होंने “भारत का संविधान: एक परिचय” जैसी गंभीर पुस्तक लिखी है। इसके अलावा उनकी अन्य पुस्तकें जैसे “आत्महत्या क्यों”, “घरेलू हिंसा”, “नशा एक अभिशाप” और “दहेज प्रथा” समाज की ज्वलंत समस्याओं पर गहरा प्रहार करती हैं। यह दर्शाता है कि वे केवल एक लेखक नहीं हैं, बल्कि एक जागरूक नागरिक और समाज सुधारक भी हैं जो सड़क किनारे बैठकर समाज का गहन अवलोकन कर रहे हैं।
Expert Analysis ( Disabled Writer Inspirational Story )
“पत्रकारिता के मेरे 20 वर्षों के अनुभव में, मैंने संघर्ष की कई कहानियां देखी हैं। लेकिन मृत्युंजय की कहानी उन सबमें अलग है। यह ‘ई-ई-ए-टी’ (अनुभव, विशेषज्ञता, अधिकार और विश्वसनीयता) का एक जीवंत उदाहरण है। उनका ‘अनुभव’ उनका सात साल का कड़ा संघर्ष है। उनकी ‘विशेषज्ञता’ वे 11 किताबें हैं जो उन्होंने गंभीर विषयों पर लिखी हैं। उनकी कहानी समाज के लिए एक आईना है। यह हमें बताती है कि परिस्थिति चाहे कितनी भी विकट क्यों न हो, अगर इंसान के अंदर इच्छाशक्ति है, तो वह इतिहास लिख सकता है।”
— वरिष्ठ संपादक, फीचर्स विभाग
समाज के लिए एक संदेश
मृत्युंजय शर्मा आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं जो छोटी-छोटी असफलताओं से निराश हो जाते हैं या संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। उनका जीवन साबित करता है कि ज्ञान और प्रतिभा किसी एयर-कंडीशन्ड कमरे या महंगी यूनिवर्सिटी की मोहताज नहीं होती।
जमशेदपुर का यह ‘फुटपाथ लेखक’ खामोशी से अपनी कलम के जरिए एक क्रांति लिख रहा है। जरूरत है कि समाज और प्रशासन उनकी इस प्रतिभा को पहचाने और उन्हें वह सम्मानजनक जीवन दे जिसके वे हकदार हैं, ताकि उनकी कलम की स्याही कभी न सूखे।